*रामलला के लिए सौ सरकारें कुर्बान,आस्था से खिलवाड़ कतई स्वीकार नहीं:गगनेन्द्र सिंह*

 







सतना। उमरिया जिले के बांधवगढ़ नेशनल पार्क स्थित प्रसिद्ध रामलला मंदिर में आस्थावान लोगों को रोके जाने की तीखी आलोचना करते हुए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता गगनेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्री रामलला हिंदुओं की आस्था के प्रतीक हैं। उमरिया जिला प्रशासन ने जो कुछ किया है उससे सभी सनातनी हिंदुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंची है। मैं मांग करता हूं कि बांधवाधीश प्राचीन मंदिर 365 दिन खोला जाए। मंदिर में किसी भक्त का प्रवेश सिर्फ इस आधार पर नहीं रोक सकते कि वहां हाथी, बाघ, शेर हैं।शेर-हाथी को संरक्षित किया जा रहा है प्रभु श्री राम के मंदिर को नहीं।मंदिर सैकड़ों वर्ष पूर्व राजा महाराजा के समय से है, जहां पूजा अर्चना होनी चाहिए।



 जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि मंदिर में स्थानीय प्रशासन द्वारा तालाबंदी के फैसले का विरोध करते हुए सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह और भाजपा नेत्री प्रज्ञा त्रिपाठी ने कड़ा विरोध जताया इसके लिए मैं उन्हें साधुवाद एवं बधाई देता हूं। गगनेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदू कमजोर नहीं है अपने मंदिरों की रक्षा के लिए तमाम आतताइयों को सबक सिखाने के इतिहास में प्रमाण हैं, यदि इस प्रकार प्रशासन सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को ठेस पहुंचाएगा तो कोई भी केसरिया ध्वज फहरा कर और जंग लगी ही सही तलवार लेकर मैदान में उतर जाएगा। यदि बांधवगढ़ के प्रसिद्ध मंदिर में जाने में कोई परेशानी थी तो उन्हें दूर करना और व्यवस्था बनाना जिला प्रशासन का काम है, इस प्रकार से मंदिर बंद करने का मैं कड़ा विरोध करता हूं। शासन-प्रशासन हमारी सनातन परंपरा पर लगातार हमले कर रहा है। हमारी परंपराओं को रोका और नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बांधवाधीश मंदिर

वहां नेशनल पार्क बनाए जाने से पहले से था फिर सरकार और वन विभाग ने क्यों नही उस मंदिर में दर्शनार्थियों के लिए दर्शन की व्यवस्था की?शेर- बाघ, हाथी आराध्य रामलला से बड़े कब से हो गए। पूर्व  अध्यक्ष ने कहा कि बांधवगढ़ में इस बार प्रशासन ने उस एक दिन भी

भक्तों को भगवान के दर्शन से वंचित किया जो वर्षों की परंपरा से खुलता था। यह राम भक्तों की आस्था पर कड़ा प्रहार है। उन्होंने साफ कहा कि भगवान राम के लिए राजनैतिक दल हों या सरकार सब कुछ कुर्बान है। श्री सिंह ने कहा जब माधवगढ़ किला हैरिटेज हो सकता है तो बांधवगढ़ से परहेज क्यों? उन्होंने मांग की है कि जिस प्रकार से नेशनल पार्क में व्यवस्था की गई है वैसे ही मंदिर में जाने के लिए कॉरीडोर विकसित किया जाए।

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